Gita saar in hindi pdf

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Chimeric Antigen Receptor–Modified T Cells

Chimeric Antigen Receptor–Modified T Cells आसुरी योनि को प्राप्त हुए मूर्ख मनुष्य अनेकों जन्मों तक आसुरी योनि को ही प्राप्त होते रहते हैं, ऎसे आसुरी स्वभाव वाले मनुष्य मुझे प्राप्त न होकर अत्यन्त अधम गति (निम्न योनि) को ही प्राप्त होते हैं। (२०) (शास्त्रानुकूल आचरणों के लिए प्रेरणा) भावार्थ : हे कुन्तीपुत्र! We designed a lentiviral vector expressing a chimeric antigen receptor with specificity for the B-cell antigen CD19, coupled with CD137 a costimulatory receptor in T.

Bhagavad-<strong>Gita</strong> in <strong>Hindi</strong> By Ramananda, Int'l

Bhagavad-Gita in Hindi By Ramananda, Int'l मैं यज्ञ करूँगा, दान दूँगा और इस प्रकार मै जीवन का मजा लूँगा, इस प्रकार आसुरी स्वभाव वाले मनुष्य अज्ञानवश मोहग्रस्त होते रहते हैं। (१५) भावार्थ : हे कुन्तीपुत्र! Buy Bhagavad Gita in Hindi by Ramananda, the founder of the Int'l Gita Society.

Library of <i>Hindi</i> Books - Download Free <i>Hindi</i> Books <i>PDF</i>

Library of Hindi Books - Download Free Hindi Books PDF इस संसार में उत्पन्न सभी मनुष्यों के स्वभाव दो प्रकार के ही होते है, एक दैवीय स्वभाव और दूसरा आसुरी स्वभाव, उनमें से दैवीय गुणों को तो विस्तार पूर्वक कह चुका हूँ, अब तू आसुरी गुणों को भी मुझसे सुन। (६) भावार्थ : आसुरी स्वभाव वाले मनुष्य यह नही जानते हैं कि क्या करना चाहिये और क्या नही करना चाहिये, वह न तो बाहर से और न अन्दर से ही पवित्र होते है, वह न तो कभी उचित आचरण करते है और न ही उनमें सत्य ही पाया जाता है। (७) भावार्थ : आसुरी स्वभाव वाले मनुष्य कहते हैं कि जगत्‌ झूठा है इसका न तो कोई आधार है और न ही कोई ईश्वर है, यह संसार बिना किसी कारण के केवल स्त्री-पुरुष के संसर्ग से उत्पन्न हुआ है, कामेच्छा के अतिरिक्त अन्य कोई कारण नही है। (८) भावार्थ : इस प्रकार की दृष्टि को स्वीकार करने वाले मनुष्य जिनका आत्म-ज्ञान नष्ट हो गया है, बुद्धिहीन होते है, ऎसे आसुरी स्वभाव वाले मनुष्य केवल विनाश के लिये ही अनुपयोगी कर्म करते हैं जिससे संसार का अहित होता है। (९) भावार्थ : आसुरी स्वभाव वाले मनुष्य कभी न तृप्त होने वाली काम-वासनाओं के अधीन, झूठी मान-प्रतिष्ठा के अहंकार से युक्त, मोहग्रस्त होकर ज़ड़ वस्तुओं को प्राप्त करने के लिये अपवित्र संकल्प धारण किये रहते हैं। (१०) भावार्थ : आसुरी स्वभाव वाले मनुष्य सोचते रहते हैं कि वह शत्रु मेरे द्वारा मारा गया और उन अन्य शत्रुओं को भी मैं मार डालूँगा, मैं ही भगवान हूँ, मैं ही समस्त ऐश्र्वर्य को भोगने वाला हूँ, मैं ही सिद्ध हूँ, मैं ही सबसे शक्तिशाली हूँ, और मैं ही सबसे सुखी हूँ। (१४) भावार्थ : आसुरी स्वभाव वाले मनुष्य सोचते रहते हैं कि मैं सबसे धनी हूँ, मेरा सम्बन्ध बड़े कुलीन परिवार से है, मेरे समान अन्य कौन है? Hindi Books Largest Library in India. Select your specific category and download best hindi books for free.

Dwarkadheesh Vastu - Vastu Consultant in

Dwarkadheesh Vastu - Vastu Consultant in तू शोक मत कर, क्योंकि तू दैवीय गुणों से युक्त होकर उत्पन्न हुआ है। (५) (आसुरी स्वभाव वालों के लक्षण) भावार्थ : हे अर्जुन! Provide services on vastu shastra, Indian Vastu Solutions, Free Vastu Consultancy services, vastu home, vastu house, vastu consultant, vastu for.

OHM ॐ AUM-SIVOHM Yog-Sutra-Index Page

OHM ॐ AUM-SIVOHM Yog-Sutra-Index Page भगवाद गीतालाई सनातन वैदिक (हिन्दु) धर्मको सार मानिन्छ । यसका विचारहरु संसारका सबै मान्छे र सबै कालखण्डमा लागु हुनसक्छन् । यसमा योग, कर्म, वेदान्त र भक्ति जस्ता विषयमा व्यवहारिक तथा महान निर्देशनहरु पाइन्छन् । यसमा भगवानले ‘सहि कर्म’ के हो र ‘भगवानले आफ्ना भक्तलाई कसरी उद्धार गर्छन्’ भन्ने महत्वपूर्ण कुरा उल्लेख गरिएको छ । “तिमी खाली हात यो संसारमा आउछौ र खाली हात जान्छौ । जुन कुरा आज तिम्रो छ, त्यो हिजो कसैको थियो, र भोलि अरु कसैको हुनेछ । यसकारण तिमि जे काम गर्छौ त्यो भगवानलाई समर्पण गर ।” “You came empty handed, you will leave empty handed. Yog Sutra Of Patanjali-Gujarati- પતંજલિના યોગસૂત્રો -સરળ ગુજરાતીમાં

Read / Download Hanuman Bahuk in

Read / Download Hanuman Bahuk in जो मनुष्य इन तीनों अज्ञान रूपी नरक के द्वारों से मुक्त हो जाता है, वह मनुष्य अपनी आत्मा के लिये कल्याणकारी कर्म का आचरण करता हुआ परम-गति (परमात्मा) को प्राप्त हो जाता है। (२२) भावार्थ : जो मनुष्य कामनाओं के वश में होकर शास्त्रों की विधियों को त्याग कर अपने ही मन से उत्पन्न की गयीं विधियों से कर्म करता रहता है, वह मनुष्य न तो सिद्धि को प्राप्त कर पाता है, न सुख को प्राप्त कर पाता है और न परम-गति को ही प्राप्त हो पाता है। (२३) भावार्थ : हे अर्जुन! Provides services of Hanuman Bahuk in Hindi in pdf, Read Hanuman Bahuk in Hindi, Free Downlaod Hanuman Bahuk in Hindi, Hanuman Bahuk in Hindi E.

TELUGUDEVOTIONALSWARANJALI

TELUGUDEVOTIONALSWARANJALI परमात्मा पर पूर्ण विश्वास करने का भाव (निर्भयता), अन्त:करण की शुद्धता का भाव (आत्मशुद्धि), परमात्मा की प्राप्ति के ज्ञान में दृड़ स्थित भाव (ज्ञान-योग), समर्पण का भाव (दान), इन्द्रियों को संयमित रखने का भाव (आत्म-संयम), नियत-कर्म करने का भाव (यज्ञ-परायणता), स्वयं को जानने का भाव (स्वाध्याय), परमात्मा प्राप्ति का भाव (तपस्या) और सत्य को न छिपाने का भाव (सरलता)। (१) भावार्थ : किसी को भी कष्ट नहीं पहुँचाने का भाव (अहिंसा), मन और वाणी से एक होने का भाव (सत्यता), गुस्सा रोकने का भाव (क्रोधविहीनता), कर्तापन का अभाव (त्याग), मन की चंचलता को रोकने का भाव (शान्ति), किसी की भी निन्दा न करने का भाव (छिद्रान्वेषण), समस्त प्राणीयों के प्रति करुणा का भाव (दया), लोभ से मुक्त रहने का भाव (लोभविहीनता), इन्द्रियों का विषयों के साथ संयोग होने पर भी उनमें आसक्त न होने का भाव (अनासक्ति), मद का अभाव (कोमलता), गलत कार्य हो जाने पर लज्जा का भाव और असफलता पर विचलित न होने का भाव (दृड़-संकल्प)। (२) भावार्थ : ईश्वरीय तेज का होना, अपराधों के लिये माफ कर देने का भाव (क्षमा), किसी भी परिस्थिति में विचलित न होने का भाव (धैर्य), मन और शरीर से शुद्ध रहने का भाव (पवित्रता), किसी से भी ईर्ष्या न करने का भाव और सम्मान न पाने का भाव यह सभी तो दैवीय स्वभाव (गुण) को लेकर उत्पन्न होने वाले मनुष्य के लक्षण हैं। (३) भावार्थ : दैवीय गुण मुक्ति का कारण बनते हैं और आसुरी गुण बन्धन का कारण माने जाते है, हे पाण्डुपुत्र अर्जुन! OUR VIDEO CHANNELS PDF BOOKS CHANNEL hindudevotional2

B K Usha Lectures -

B K Usha Lectures - What is yours today, belonged to someone else yesterday, and will belong to someone else the day after tomorrow. Sr Code No. Title Download MP4 Download MP3 Sahaj Rajyog 000. Rajyog Kya Hai - BK Usha Bahen 001. 1st Day - Part-1 - Atma Apna ke Satya.

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